भूल-भुलैया में भी हम को इक-इक रस्ता याद रहा उन आँखों में जबसे देखा अपना ठिकाना भूल गए
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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मुझ में बस एक ही ख़राबी है मैं ज़बाँ-ओ-दिमाग़ रखता हूँ
DEVANSH TIWARI
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मेयार-ए-ज़र्फ़ तो पहचान हमारा दुश्मन भी लगता है मेहमान हमारा हम ग़ज़लें कहने वाले लड़के हैं हर नुक़्ते पर रहता है ध्यान हमारा
DEVANSH TIWARI
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वो मुझे पूछते हैं गाँव में क्या रक्खा है मैं उन्हें कहता हूँ सब मेरे बड़े रहते हैं
DEVANSH TIWARI
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किसी से कह नहीं सकता हूँ जो मैं वही तो शा'इरी में कहता हूँ
DEVANSH TIWARI
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उस की मर्ज़ी उस का सब है हम ना करते करता रब है
DEVANSH TIWARI
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