वो मुझे पूछते हैं गाँव में क्या रक्खा है मैं उन्हें कहता हूँ सब मेरे बड़े रहते हैं
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मेयार-ए-ज़र्फ़ तो पहचान हमारा दुश्मन भी लगता है मेहमान हमारा हम ग़ज़लें कहने वाले लड़के हैं हर नुक़्ते पर रहता है ध्यान हमारा
DEVANSH TIWARI
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मुझ में बस एक ही ख़राबी है मैं ज़बाँ-ओ-दिमाग़ रखता हूँ
DEVANSH TIWARI
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उस के दर पर ही बिला शर्त खड़े रहते हैं जैसे परवाने हों जो लौ से अड़े रहते हैं उस का दिल दिल नहीं मयख़ाना हो जैसे यारों चार छह लोग जहाँ यूँँ ही पड़े रहते हैं
DEVANSH TIWARI
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किसी से कह नहीं सकता हूँ जो मैं वही तो शा'इरी में कहता हूँ
DEVANSH TIWARI
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इश्क़ में हद से बढ़ सकती है,बेहतर है सीप में मोती गढ़ सकती है,बेहतर है ख़ामोशी भी सुन सकती है वो लड़की मतलब आँखें पढ़ सकती है,बेहतर है
DEVANSH TIWARI
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