इश्क़ में हद से बढ़ सकती है,बेहतर है सीप में मोती गढ़ सकती है,बेहतर है ख़ामोशी भी सुन सकती है वो लड़की मतलब आँखें पढ़ सकती है,बेहतर है
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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उस के दर पर ही बिला शर्त खड़े रहते हैं जैसे परवाने हों जो लौ से अड़े रहते हैं उस का दिल दिल नहीं मयख़ाना हो जैसे यारों चार छह लोग जहाँ यूँँ ही पड़े रहते हैं
DEVANSH TIWARI
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मुझ में बस एक ही ख़राबी है मैं ज़बाँ-ओ-दिमाग़ रखता हूँ
DEVANSH TIWARI
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वो मुझे पूछते हैं गाँव में क्या रक्खा है मैं उन्हें कहता हूँ सब मेरे बड़े रहते हैं
DEVANSH TIWARI
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किसी से कह नहीं सकता हूँ जो मैं वही तो शा'इरी में कहता हूँ
DEVANSH TIWARI
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दग़ा का सोचते ही जाँ मुझ पर मेरी तस्वीर हँसने वाली थी
DEVANSH TIWARI
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