bose apne aariz-e-gulfam ke la mujhe de de tere kis kaam ke
Related Sher
मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
271 likes
शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
839 likes
बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
751 likes
ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
174 likes
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
594 likes
More from Muztar Khairabadi
बोसे अपने आरिज़-ए-गुलफ़ाम के ला मुझे दे दे तिरे किस काम के
Muztar Khairabadi
25 likes
वो गले से लिपट के सोते हैं आज-कल गर्मियाँ हैं जाड़ों में
Muztar Khairabadi
45 likes
वफ़ा क्या कर नहीं सकते हैं वो लेकिन नहीं करते कहा क्या कर नहीं सकते हैं वो लेकिन नहीं करते
Muztar Khairabadi
34 likes
वो करेंगे वस्ल का वा'दा वफ़ा रंग गहरे हैं हमारी शाम के
Muztar Khairabadi
31 likes
लड़ाई है तो अच्छा रात-भर यूँँ ही बसर कर लो हम अपना मुँह इधर कर लें तुम अपना मुँह उधर कर लो
Muztar Khairabadi
47 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Muztar Khairabadi.
Similar Moods
More moods that pair well with Muztar Khairabadi's sher.







