बुझेगी कभी तो मेरी प्यास लगी है मुझे अब यही आस हो जाए मेरी काश वो ही जिसे चाहता हूँ जो है ख़ास
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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याद है जब कहा करती थी माँ घर आ तेरी मरम्मत करूँँगी
Sahil Verma
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याद बनकर लिखा होता दिल पे जो भी एक आँसू वो सब कुछ मिटा आता है
Sahil Verma
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वो लड़का जो तुम्हें कहीं मिल गया है वही जिस पे तुम्हारा ये दिल गया है सखी वो बहुत अच्छा लड़का है मुझ सेे तभी दूर तुम सेे ये साहिल गया है
Sahil Verma
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कामयाबी को मेरी क़िस्मत करूँँगी कोई इज़्ज़त देगा तो इज़्ज़त करूँँगी
Sahil Verma
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ये ग़ज़ल ग़ैर मुसलसल है पर इस में मतला है न ही मक़्ता है
Sahil Verma
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