सेल, जज़्बों की घडी का, बंद सा है अपनी सूई अटकी है, दोस्ती पे आ कर
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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तुम ने जब से अपनी पलकों पर रक्खा कालिख़ को सब काजल काजल कहते हैं इश्क़ में पागल ही तो होना होता है पागल हैं जो मुझ को पागल कहते हैं
Vishal Bagh
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वो मेरे चेहरे तक अपनी नफरतें लाया तो था मैं ने उस के हाथ चू में और बेबस कर दिया
Waseem Barelvi
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अब मैं क्या अपनी मोहब्बत का भरम भी न रखूँ मान लेता हूँ कि उस शख़्स में था कुछ भी नहीं
Jawwad Sheikh
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हो गया ग्यारह का तो दिखने लगीं मजबूरियाँ बीस का होते ही अपनी नौजवानी छोड़ दी
nakul kumar
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जैसे उस एक दिए ने रात का ख़याल रखा है मेरे सन्नाटों को तेरी आवाज़ ने सँभाल रखा है
Ankit
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सब लोगों ने दुआ ही पुकारी दवा के बा'द मैं ने तुम्हारा नाम पुकारा तुम्हारे बा'द
Ankit
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दिल में उतरना था उसे दिल से ही वो उतर गया
Ankit
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मैं ख़ुशी से कर लेता, खुद-कुशी, कई सौ बार मुझ को खा गया घर का ख़याल भी, उन्हीं सौ बार
Ankit
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उस की बातें इतनी मीठी लगती है फिर हमारी चाय फ़ीकी लगती है
Ankit
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