चंद पेड़ों को ही मजनूँ की दुआ होती है सब दरख़्तों पे तो पत्थर नहीं आया करता
sherKuch Alfaaz
Ahmad Kamran0 Likes
Related Sher
हाथ ख़ाली है तेरे शहर से जाते जाते जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते
Rahat Indori
118 likes
तुम नहीं उतरोगी मैं उतरूँगा गहराई में पगड़ी बड़ी होती है दुपट्टे से लंबाई में
Muzdum Khan
63 likes
मेरी दुआ है और इक तरह से बद-दुआ भी है ख़ुदा तुम्हें तुम्हारे जैसी बेटियाँ अता करे
Tehzeeb Hafi
150 likes
ख़ुदा की शा'इरी होती है औरत जिसे पैरों तले रौंदा गया है तुम्हें दिल के चले जाने पे क्या ग़म तुम्हारा कौन सा अपना गया है
Ali Zaryoun
63 likes
अब तो पाँच मिनट के अंदर चेहरे बदले जाते हैं जीवन मिट्टी हो जाता था एक मुहब्बत होती थी
Ali Zaryoun
66 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Ahmad Kamran.
Similar Moods
More moods that pair well with Ahmad Kamran's sher.







