चार दिन की ज़िंदगी जिस में यहाँ रह गए हैं दो ही दिन मेरे लिए
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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मैं अकेला ही नहीं था इश्क़ में जो लिखे उस ने वो ख़त भी देखिए काग़ज़ी है इश्क़ अब तो मानिए काग़ज़ों पर दस्तख़त भी देखिए
Ravi 'VEER'
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ख़्वाबों को देखने से मिला कुछ नहीं मुझे लेकिन शब-ए-ज़ुल्मत से गिला कुछ नहीं मुझे
Ravi 'VEER'
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देखिए ये डिग्रियाँ दीवार पर धूल की इन पर परत भी देखिए देखिए सच देश के हालात का और क्या इस में ग़लत भी देखिए
Ravi 'VEER'
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तिरे बिन मिरे दिन ये कटते नहीं है बता क्या करें हम अगर रात हो तो
Ravi 'VEER'
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जिस तरह पत्ते गिरे है शाख़ से ठीक वैसे ही गिरा हूँ यार मैं नासमझ था मैं बहुत पहले मगर अब बहुत ही सरफिरा हूँ यार मैं
Ravi 'VEER'
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