चराग़ घर का हो महफ़िल का हो कि मंदिर का हवा के पास कोई मसलहत नहीं होती
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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तुम्हारा प्यार तो साँसों में साँस लेता है जो होता नश्शा तो इक दिन उतर नहीं जाता
Waseem Barelvi
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कोई शिकवा न करे बहते हुए पानी से कश्तियाँ डूबी हैं कुछ अपनी ही मनमानी से
Waseem Barelvi
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धूप के एक ही मौसम ने जिन्हें तोड़ दिया इतने नाज़ुक भी ये रिश्ते न बनाए होते
Waseem Barelvi
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ध्यान रहे ये लोग तुम्हारी सफ़ में डर कर आए हैं तुम को ज़िंदा क्या रक्खेंगे जो ख़ुद मर कर आए हैं
Waseem Barelvi
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मोहब्बत के घरों के कच्चे-पन को ये कहाँ समझें इन आँखों को तो बस आता है बरसातें बड़ी करना
Waseem Barelvi
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