'दानिश' यूँँ तस्लीम नहीं करती दुनिया अपने आप को साबित करना पड़ता है
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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अपनी दुनिया भी चल पड़े शायद इक रुका फ़ैसला किया जाए
Madan Mohan Danish
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पत्थर पहले ख़ुद को पत्थर करता है उस के बा'द ही कुछ कारीगर करता है
Madan Mohan Danish
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क्यूँँ ज़रूरी है किसी के पीछे पीछे हम चलें जब सफ़र अपना है तो अपनी रवानी चाहिए
Madan Mohan Danish
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गुज़रता ही नहीं वो एक लम्हा इधर मैं हूँ कि बीता जा रहा हूँ
Madan Mohan Danish
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मंज़िलें आती जाती रहती हैं किस लिए राह में रुका जाए
Madan Mohan Danish
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