क्यूँँ ज़रूरी है किसी के पीछे पीछे हम चलें जब सफ़र अपना है तो अपनी रवानी चाहिए
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Madan Mohan Danish
@madan-mohan-danish
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Sher
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Ghazal
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
पत्थर पहले ख़ुद को पत्थर करता है उस के बा'द ही कुछ कारीगर करता है
sherKuch Alfaaz
अपनी दुनिया भी चल पड़े शायद इक रुका फ़ैसला किया जाए
sherKuch Alfaaz
ये हासिल है मिरी ख़ामोशियों का कि पत्थर आज़माने लग गए हैं
sherKuch Alfaaz
गुज़रता ही नहीं वो एक लम्हा इधर मैं हूँ कि बीता जा रहा हूँ
sherKuch Alfaaz
कुछ भी आसान न था पहले भी फिर भी हम खुल के हँसा करते थे
sherKuch Alfaaz
वरना बे-मौत ही मर जाएँगे सारे किरदार एक इनकार ज़रूरी है कहानी के लिए
sherKuch Alfaaz
मेरी मुझ सेे निभ तो सकती थी मगर कोई था जो दरमियाँ आता रहा
sherKuch Alfaaz
मेरी हर गुफ़्तगू ज़मीं से रही यूँँ तो फ़ुर्सत में आसमान भी था
sherKuch Alfaaz
अस्ल में पाया ही 'दानिश' तब उसे जब उसे खोने का डर जाता रहा
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