मंज़िलें आती जाती रहती हैं किस लिए राह में रुका जाए
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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क्यूँँ ज़रूरी है किसी के पीछे पीछे हम चलें जब सफ़र अपना है तो अपनी रवानी चाहिए
Madan Mohan Danish
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कुछ भी आसान न था पहले भी फिर भी हम खुल के हँसा करते थे
Madan Mohan Danish
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ये हासिल है मिरी ख़ामोशियों का कि पत्थर आज़माने लग गए हैं
Madan Mohan Danish
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वरना बे-मौत ही मर जाएँगे सारे किरदार एक इनकार ज़रूरी है कहानी के लिए
Madan Mohan Danish
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मेरी हर गुफ़्तगू ज़मीं से रही यूँँ तो फ़ुर्सत में आसमान भी था
Madan Mohan Danish
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