दर पे आया न जाने क्यूँँ आया आदतें सब कहाँ बदलती हैं
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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जा तुझे जाने दिया जानाँ मेरी जानाँ जान अब तू हो गई अनजान हो जैसे
nakul kumar
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मंज़िलों का कौन जाने रहगुज़र अच्छी नहीं उस की आँखें ख़ूब-सूरत है नज़र अच्छी नहीं
Abrar Kashif
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पास मुझे बैठने नहीं देती अब उस की पसंद की जो साड़ी नहीं ली
sahllucknowi
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ज़िंदगी बस साँस लेना ही नहीं है ये समझ लो थपथपा दें पीठ जो पापा तो क्या ही बात होगी
sahllucknowi
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तीर मेरी रूह में जा कर धँसा था और वो मरहम जिस्म तक ही करता था काम
sahllucknowi
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कल तलक लब थे मिरे अब वो सूखा तर गया
sahllucknowi
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मुझ सेे मुहब्बत करने का फ़न सीख गया वो अब सब सेे अपनी असलियत छुपाता रहेगा
sahllucknowi
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