sherKuch Alfaaz

दर्द, आँसू, बे-क़रारी, हिज्र, यादें, बेख़ुदी कौन कहता है मोहब्बत में मिला कुछ भी नहीं

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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया

Tehzeeb Hafi

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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है

Tehzeeb Hafi

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मोहब्बत दो-क़दम पर थक गई थी मगर ये हिज्र कितना चल रहा है

Zubair Ali Tabish

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सारे आँसू तुझ पर ज़ाया' क्यूँँ कर दें हमनें तेरे बा'द भी दिलबर करने हैं

Shikha Pachouly

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नाप रहा था एक उदासी की गहराई हाथ पकड़कर वापस लाई है तन्हाई वस्ल दिनों को काफ़ी छोटा कर देता है हिज्र बढ़ा देता है रातों की लम्बाई

Tanoj Dadhich

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