हैं ज़रूरी काम मुझ को शे'र कहने के सिवा भी सोचना और सोचना, बस सोचना उस को मुसलसल
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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साहिब-ए-सख़ा हो तुम, ये भी रहम अता करो मुश्किलों का दौर है, दुआ करो दुआ करो मौत की जकड़ से साँस लौट आएगी भला तुम ख़ुदा का रूप हो, रज़ा करो रज़ा करो
Prashant Beybaar
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तुझ पे मर के हम ने आख़िर अब ये जाना ख़ा-मख़ा ही तुझ को माने ज़िन्दगी हम
Prashant Beybaar
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चलो इक बात से बेबार की मुझ को तसल्ली है तवक़्क़ो ख़ुद किसी से वो कभी दिल में नहीं रखता
Prashant Beybaar
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वो दिन इज़हार का है याद अब तक इस क़दर मुझ को कि जैसे रातें उस के बा'द सब जगकर गुज़ारी हों
Prashant Beybaar
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कोहरा जो देखा उस ने ठिठराके मुझ सेे पूछा मौसम ये सर्द है या हसरत जली है कोई
Prashant Beybaar
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