चलो भला है कि हर शख़्स तन्हा है दिल में वगरना कौन किसी का यहाँ सहारा बने
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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साहिब-ए-सख़ा हो तुम, ये भी रहम अता करो मुश्किलों का दौर है, दुआ करो दुआ करो मौत की जकड़ से साँस लौट आएगी भला तुम ख़ुदा का रूप हो, रज़ा करो रज़ा करो
Prashant Beybaar
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तुझ पे मर के हम ने आख़िर अब ये जाना ख़ा-मख़ा ही तुझ को माने ज़िन्दगी हम
Prashant Beybaar
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हैं ज़रूरी काम मुझ को शे'र कहने के सिवा भी सोचना और सोचना, बस सोचना उस को मुसलसल
Prashant Beybaar
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दर्द, आँसू, बे-क़रारी, हिज्र, यादें, बेख़ुदी कौन कहता है मोहब्बत में मिला कुछ भी नहीं
Prashant Beybaar
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किसी सीने पे आहट दी, किसी काँधे पे सर रक्खा हुए कितने भी बेपरवाह मगर बस एक घर रक्खा
Prashant Beybaar
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