किसी सीने पे आहट दी, किसी काँधे पे सर रक्खा हुए कितने भी बेपरवाह मगर बस एक घर रक्खा
Related Sher
शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
839 likes
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
594 likes
मेरे नाम से क्या मतलब है तुम्हें मिट जाएगा या रह जाता है जब तुम ने ही साथ नहीं रहना फिर पीछे क्या रह जाता है मेरे पास आने तक और किसी की याद उसे खा जाती है वो मुझ तक कम ही पहुँचता है किसी और जगह रह जाता है
Tehzeeb Hafi
213 likes
मैं किसी तरह भी समझौता नहीं कर सकता या तो सब कुछ ही मुझे चाहिए या कुछ भी नहीं
Jawwad Sheikh
89 likes
और फिर एक दिन बैठे बैठे मुझे अपनी दुनिया बुरी लग गई जिस को आबाद करते हुए मेरे मां-बाप की ज़िंदगी लग गई
Tehzeeb Hafi
207 likes
More from Prashant Beybaar
साहिब-ए-सख़ा हो तुम, ये भी रहम अता करो मुश्किलों का दौर है, दुआ करो दुआ करो मौत की जकड़ से साँस लौट आएगी भला तुम ख़ुदा का रूप हो, रज़ा करो रज़ा करो
Prashant Beybaar
0 likes
तुझ पे मर के हम ने आख़िर अब ये जाना ख़ा-मख़ा ही तुझ को माने ज़िन्दगी हम
Prashant Beybaar
0 likes
हैं ज़रूरी काम मुझ को शे'र कहने के सिवा भी सोचना और सोचना, बस सोचना उस को मुसलसल
Prashant Beybaar
0 likes
दर्द, आँसू, बे-क़रारी, हिज्र, यादें, बेख़ुदी कौन कहता है मोहब्बत में मिला कुछ भी नहीं
Prashant Beybaar
0 likes
चलो इक बात से बेबार की मुझ को तसल्ली है तवक़्क़ो ख़ुद किसी से वो कभी दिल में नहीं रखता
Prashant Beybaar
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Prashant Beybaar.
Similar Moods
More moods that pair well with Prashant Beybaar's sher.







