दौर-ए-तूफ़ाँ में भी जी लेते हैं जीने वाले दूर साहिल से किसी मौज-ए-गुरेज़ाँ की तरह
Related Sher
तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
1279 likes
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
594 likes
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
More from Ghulam Rabbani Taban
ये चार दिन की रिफ़ाक़त भी कम नहीं ऐ दोस्त तमाम उम्र भला कौन साथ देता है
Ghulam Rabbani Taban
5 likes
आज किसी ने बातों बातों में जब उन का नाम लिया दिल ने जैसे ठोकर खाई दर्द ने बढ़ कर थाम लिया
Ghulam Rabbani Taban
4 likes
यादों के साए हैं न उमीदों के हैं चराग़ हर शय ने साथ छोड़ दिया है तेरी तरह
Ghulam Rabbani Taban
8 likes
रह-ए-तलब में किसे आरज़ू-ए-मंज़िल है शुऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है
Ghulam Rabbani Taban
8 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Ghulam Rabbani Taban.
Similar Moods
More moods that pair well with Ghulam Rabbani Taban's sher.







