यादों के साए हैं न उमीदों के हैं चराग़ हर शय ने साथ छोड़ दिया है तेरी तरह
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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मेरे नाम से क्या मतलब है तुम्हें मिट जाएगा या रह जाता है जब तुम ने ही साथ नहीं रहना फिर पीछे क्या रह जाता है मेरे पास आने तक और किसी की याद उसे खा जाती है वो मुझ तक कम ही पहुँचता है किसी और जगह रह जाता है
Tehzeeb Hafi
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ये चार दिन की रिफ़ाक़त भी कम नहीं ऐ दोस्त तमाम उम्र भला कौन साथ देता है
Ghulam Rabbani Taban
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दौर-ए-तूफ़ाँ में भी जी लेते हैं जीने वाले दूर साहिल से किसी मौज-ए-गुरेज़ाँ की तरह
Ghulam Rabbani Taban
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आज किसी ने बातों बातों में जब उन का नाम लिया दिल ने जैसे ठोकर खाई दर्द ने बढ़ कर थाम लिया
Ghulam Rabbani Taban
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रह-ए-तलब में किसे आरज़ू-ए-मंज़िल है शुऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है
Ghulam Rabbani Taban
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