देख कर तेरी नज़ाकत, ज़ेब-ओ-ज़ीनत आइना भी तुझ सेा बनते जा रहा है
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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खा रहा है कब से मुझ को इक सवाल ज़िंदगी ज़िंदा रखेगी कब तलक
Nishad
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दोस्त भी है, इश्क़ भी है, लेकिन इन में दर्द भी है इस लिए तो ज़िंदगी के फ़लसफ़े में शा'इरी है
Nishad
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आप को लम्स भी मुयस्सर है मुझ को दीदार तक नसीब नहीं
Nishad
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भटकते फिर रहा है इक बदन से दूसरे तक ग़म अब इस ग़म को थकन के मारे बस जी भर के रोना है
Nishad
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तुम सेे बिछड़े हैं तो कलेंडर ये तब से बस फ़रवरी में अटका है
Nishad
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