खा रहा है कब से मुझ को इक सवाल ज़िंदगी ज़िंदा रखेगी कब तलक
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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जनाज़े पर मेरे लिख देना यारों मोहब्बत करने वाला जा रहा है
Rahat Indori
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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देख कर तेरी नज़ाकत, ज़ेब-ओ-ज़ीनत आइना भी तुझ सेा बनते जा रहा है
Nishad
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भटकते फिर रहा है इक बदन से दूसरे तक ग़म अब इस ग़म को थकन के मारे बस जी भर के रोना है
Nishad
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आप को लम्स भी मुयस्सर है मुझ को दीदार तक नसीब नहीं
Nishad
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अब इस सेे बेहतर कैसे समझाता मैं ख़ाली-पन उसे मैं ने उसे ख़त भेजा और ख़त में लिखा कुछ भी नहीं
Nishad
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तुम सेे बिछड़े हैं तो कलेंडर ये तब से बस फ़रवरी में अटका है
Nishad
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