अब इस सेे बेहतर कैसे समझाता मैं ख़ाली-पन उसे मैं ने उसे ख़त भेजा और ख़त में लिखा कुछ भी नहीं
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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देख कर तेरी नज़ाकत, ज़ेब-ओ-ज़ीनत आइना भी तुझ सेा बनते जा रहा है
Nishad
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खा रहा है कब से मुझ को इक सवाल ज़िंदगी ज़िंदा रखेगी कब तलक
Nishad
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भटकते फिर रहा है इक बदन से दूसरे तक ग़म अब इस ग़म को थकन के मारे बस जी भर के रोना है
Nishad
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आप को लम्स भी मुयस्सर है मुझ को दीदार तक नसीब नहीं
Nishad
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तुम सेे बिछड़े हैं तो कलेंडर ये तब से बस फ़रवरी में अटका है
Nishad
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