दोस्त भी है, इश्क़ भी है, लेकिन इन में दर्द भी है इस लिए तो ज़िंदगी के फ़लसफ़े में शा'इरी है
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
489 likes
बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
325 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
More from Nishad
खा रहा है कब से मुझ को इक सवाल ज़िंदगी ज़िंदा रखेगी कब तलक
Nishad
1 likes
देख कर तेरी नज़ाकत, ज़ेब-ओ-ज़ीनत आइना भी तुझ सेा बनते जा रहा है
Nishad
0 likes
भटकते फिर रहा है इक बदन से दूसरे तक ग़म अब इस ग़म को थकन के मारे बस जी भर के रोना है
Nishad
1 likes
आप को लम्स भी मुयस्सर है मुझ को दीदार तक नसीब नहीं
Nishad
1 likes
तुम सेे बिछड़े हैं तो कलेंडर ये तब से बस फ़रवरी में अटका है
Nishad
2 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Nishad.
Similar Moods
More moods that pair well with Nishad's sher.







