देखा कि पहले शहर में मज़लूम कितने हैं फिर मुझ को इंतिख़ाब कर रुसवा किया गया
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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वो शम्अ' के मानिंद हर वक़्त जलती रहती थी फिर मैं भी अपनी ज़ात का परवाना हो गया
Parwez Akhtar
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तू मुझे फिर ढूंढता रह जाएगा बिनई लिए और इधर ज़िन्दगी के साथ हो जाऊँगा मैं
Parwez Akhtar
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मैं उस के पास में बैठूँ तो इस का सबब पूछता है क्या मैं अपने आप पे एहसान कर नहीं सकता ?
Parwez Akhtar
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मैं अपनी दु'आओं में असर ढूँडता रहा उस में छुपा जो ज़र था वो ज़र ढूँडता रहा नाकामियों में मैं ने गुज़ारी है ज़िन्दगी नाकामियों में अपना हुनर ढूँडता रहा
Parwez Akhtar
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मैं सोच रहा था कल रात ऐसे रिश्तों में तो जुम्बिश भी नहीं आती वो है तो इंग्लिश में बात करती है और मुझे तो इंग्लिश भी नहीं आती
Parwez Akhtar
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