sherKuch Alfaaz

धोखे के बा'द विश्वास पहले सा दोबारा नहीं रहता घर की दहलीज़ पे है बंजारा बंजारा नहीं रहता वो ही इश्क़ मिरी जाँ मैं तुझ सेे अब दोहराऊँ कैसे टूटा जो एक बार तारा तो फिर तारा नहीं रहता

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