रूह को गाँव की दहलीज़ पे रख कर इक बदन गया है शहर कमाने
Related Sher
बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
751 likes
वो ज़माना गुज़र गया कब का था जो दीवाना मर गया कब का
Javed Akhtar
117 likes
कोई हसीन बदन जिन की दस्तरस में नहीं यही कहेंगे कि कुछ फ़ाएदा हवस में नहीं
Umair Najmi
109 likes
वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
107 likes
किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
109 likes
More from Chetan Verma
उस शहर-ए-नाकाम के बाशिंदे हैं हम जहाँ मिल कर के मुर्दे सभी ज़िंदा को दफ़नाते हैं
Chetan Verma
0 likes
तू भी ग़म-ए-हयात का है मारा और मैं भी चल इश्क़ छोड़ दर्द का रिश्ता बनाते हैं
Chetan Verma
0 likes
लोग सोने को बिस्तर नहीं अब बदन ढूँढ़ते हैं बस मसलने के मक़सद से वहशी चमन ढूँढ़ते हैं हाल इन बेटियों का जहाँ में तिरे देखते जब रात सोने को हम भी ख़ुदाया कफ़न ढूँढ़ते हैं
Chetan Verma
0 likes
घूम रहे बच्चे लिए ग़म भरी आँखें उन में तलब एक खुले आसमाँ की है
Chetan Verma
0 likes
धोखे के बा'द विश्वास पहले सा दोबारा नहीं रहता घर की दहलीज़ पे है बंजारा बंजारा नहीं रहता वो ही इश्क़ मिरी जाँ मैं तुझ सेे अब दोहराऊँ कैसे टूटा जो एक बार तारा तो फिर तारा नहीं रहता
Chetan Verma
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Chetan Verma.
Similar Moods
More moods that pair well with Chetan Verma's sher.







