लोग सोने को बिस्तर नहीं अब बदन ढूँढ़ते हैं बस मसलने के मक़सद से वहशी चमन ढूँढ़ते हैं हाल इन बेटियों का जहाँ में तिरे देखते जब रात सोने को हम भी ख़ुदाया कफ़न ढूँढ़ते हैं
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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उस शहर-ए-नाकाम के बाशिंदे हैं हम जहाँ मिल कर के मुर्दे सभी ज़िंदा को दफ़नाते हैं
Chetan Verma
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रूह को गाँव की दहलीज़ पे रख कर इक बदन गया है शहर कमाने
Chetan Verma
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मैं सब से दूर जाना चाहता हूँ दिल-ए-मादूम पाना चाहता हूँ
Chetan Verma
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जग उठा हूँ रह-ए-ज़िंदा में सो जलना पड़े है मैं वगरना वो दिया हूँ जिसे ज़ुल्मत है पसंद
Chetan Verma
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मक़ाम-ए-क़ैस के साथ अवाम-ए-तैश के साथ मैं निकला उस के दर से बड़ी ही ऐश के साथ
Chetan Verma
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