दिल-ए-ग़म-गुस्ता तेरी याद से ख़ाली हर शाम भरती जाती है मेरी आँख में लाली हर शाम
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ये प्यार तेरी भूल है क़ुबूल है मैं संग हूँ तू फूल है क़ुबूल है तू रूठेगी तो मैं मनाऊँगा नहीं जो रूल है वो रूल है क़ुबूल है
Varun Anand
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे
Waseem Barelvi
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बस ये दिक़्क़त है भुलाने में उसे उस के बदले में किस को याद करें
Fahmi Badayuni
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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ये सबा बे-दिली से बच जाती आसमाँ रूठने से बच जाता थाम कर हाथ जो मना लेता तो ये सब टूटने से बच जाता
Sarul
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पगली अब मुझ सेे जाने कितने दिन तक नाराज रहे कल की शब उस के सपने में थोड़ी देर से पहुँचा मैं
Sarul
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ज़िंदगी कोई भी आसान नहीं है प्यारे तू भी इस बात से अनजान नहीं है प्यारे
Sarul
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रूठ के उस को सब कुछ ही मिल जाता है जाने कौन सी बात उसे मनवानी थी
Sarul
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एक तितली ने इश्क़ कर कर के गुल की आदत ख़राब कर दी है
Sarul
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