दिलासा देते हुए लोग क्या समझ पाते हम एक शख़्स नहीं काएनात हारे थे
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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वो इतना ढेर हसीं था कि हम पे वाजिब है तमाम उम्र बिछड़ने का ग़म किया जाए
Rakib Mukhtar
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शाख़-ए-उम्मीद से कड़वा भी उतर सकता हूँ रोज़ ये बात मुझे सब्र का फल कहता है
Rakib Mukhtar
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मुझ ऐसा शख़्स अगर क़हक़हों से भर जाए ये साँस लेती उदासी तो घुट के मर जाए वो मेरे बा'द तरस जाएगा मोहब्बत को उसे ये कहना अगर हो सके तो मर जाए
Rakib Mukhtar
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