दिन ढले ऐसे कि जैसे इश्क़ में बर्बाद कोई शाम ढलते याद आए चाँद सा हर रात कोई काँपती ही रह गई ये उँगलियाँ ये होंठ जब से बात कुछ मैं लिख न पाया कह न पाया बात कोई
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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तू ख़याल रख अपना मैं ख़याल रख लूँगा है तुझे मोहब्बत तो मैं मिसाल रख लूँगा मैं अगर तुझे दूँगा जो जवाब भी अपने तो तेरे भी होंठों पे मैं सवाल रख लूँगा
Umashankar Lekhwar
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रहेगा अब अगर ग़म ज़िन्दगी भर तो रहेगा ये तेरा आशिक़ हुआ मैं बस तेरी आदत न हो पाया
Umashankar Lekhwar
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कहा तो है कि अब कोई शिकायत ही नहीं होगी सितम ये है कि आख़िर बात उन सेे भी नहीं होगी किसे पूछें कि आख़िर अब उन्हें क्या चाहिए हम सेे कहा तो है मुलाक़ातें कि उन सेे भी नहीं होगी
Umashankar Lekhwar
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रूठ सा गया है कुछ मुझ सेे ये नज़ारा भी रह गया न ख़्वाबों में अब मेरे सितारा भी वो है चाँद जिस सेे है ये मेरा जहाँ रौशन मैं चमक भी जाऊँ तो बन सकूँ न तारा भी
Umashankar Lekhwar
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मोहब्बत के अलावा अब न होगा रास्ता कोई नहीं महबूब तो तुझ सेे न होगा वास्ता कोई
Umashankar Lekhwar
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