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कहा तो है कि अब कोई शिकायत ही नहीं होगी सितम ये है कि आख़िर बात उन सेे भी नहीं होगी किसे पूछें कि आख़िर अब उन्हें क्या चाहिए हम सेे कहा तो है मुलाक़ातें कि उन सेे भी नहीं होगी

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मोहब्बत के अलावा अब न होगा रास्ता कोई नहीं महबूब तो तुझ सेे न होगा वास्ता कोई

Umashankar Lekhwar

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कभी तुम सेे थी नाराज़ी कभी तुम सेे शिकायत थी ज़माना वो भी गुज़रा जब हमें तुम सेे मोहब्बत थी बँधाता रह गया ढाढस दिया जो रातभर जलकर कहा सबने हुई जब सुब्ह उसे जलने की आदत थी

Umashankar Lekhwar

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मैं ने पूछा आज ये मुझ सेे किस-किस को बर्बाद करोगे मैं तुम को बर्बाद करूँँगा तुम किस को आबाद करोगे अपने ही हाथों से उस ने जिस घर को आबाद किया है अब क्या तुम अपने हाथों से उस घर को बर्बाद करोगे

Umashankar Lekhwar

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दिन ढले ऐसे कि जैसे इश्क़ में बर्बाद कोई शाम ढलते याद आए चाँद सा हर रात कोई काँपती ही रह गई ये उँगलियाँ ये होंठ जब से बात कुछ मैं लिख न पाया कह न पाया बात कोई

Umashankar Lekhwar

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चल पड़े थे रास्तों में हम कहीं जो कभी शायद हमारे थे नहीं ज़िन्दगी यूँँ ही गुज़रती रह गई हाल ऐसा वो कहीं है हम कहीं

Umashankar Lekhwar

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