चल पड़े थे रास्तों में हम कहीं जो कभी शायद हमारे थे नहीं ज़िन्दगी यूँँ ही गुज़रती रह गई हाल ऐसा वो कहीं है हम कहीं
Related Sher
अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
221 likes
हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
207 likes
सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
144 likes
तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
1279 likes
शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
839 likes
More from Umashankar Lekhwar
तू ख़याल रख अपना मैं ख़याल रख लूँगा है तुझे मोहब्बत तो मैं मिसाल रख लूँगा मैं अगर तुझे दूँगा जो जवाब भी अपने तो तेरे भी होंठों पे मैं सवाल रख लूँगा
Umashankar Lekhwar
1 likes
नहीं ये जानता उस की मोहब्बत में अगर तू रो रहा होगा नहीं मालूम जगके रातभर तू चैन अपना खो रहा होगा तेरी आँखों में दिखते हैं मुझे भी अब किसी की याद के साए मगर वो शख़्स तुझ को भूलके आख़िर कहीं अब सो रहा होगा
Umashankar Lekhwar
1 likes
रूठ सा गया है कुछ मुझ सेे ये नज़ारा भी रह गया न ख़्वाबों में अब मेरे सितारा भी वो है चाँद जिस सेे है ये मेरा जहाँ रौशन मैं चमक भी जाऊँ तो बन सकूँ न तारा भी
Umashankar Lekhwar
1 likes
कहा तो है कि अब कोई शिकायत ही नहीं होगी सितम ये है कि आख़िर बात उन सेे भी नहीं होगी किसे पूछें कि आख़िर अब उन्हें क्या चाहिए हम सेे कहा तो है मुलाक़ातें कि उन सेे भी नहीं होगी
Umashankar Lekhwar
2 likes
सजाया तो उसे होगा मगर अब ये तमन्ना है निहारूँ मैं उसे फिर आज रंगों से सजाकर के
Umashankar Lekhwar
3 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Umashankar Lekhwar.
Similar Moods
More moods that pair well with Umashankar Lekhwar's sher.







