sherKuch Alfaaz

कभी तुम सेे थी नाराज़ी कभी तुम सेे शिकायत थी ज़माना वो भी गुज़रा जब हमें तुम सेे मोहब्बत थी बँधाता रह गया ढाढस दिया जो रातभर जलकर कहा सबने हुई जब सुब्ह उसे जलने की आदत थी

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तू ख़याल रख अपना मैं ख़याल रख लूँगा है तुझे मोहब्बत तो मैं मिसाल रख लूँगा मैं अगर तुझे दूँगा जो जवाब भी अपने तो तेरे भी होंठों पे मैं सवाल रख लूँगा

Umashankar Lekhwar

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रूठ सा गया है कुछ मुझ सेे ये नज़ारा भी रह गया न ख़्वाबों में अब मेरे सितारा भी वो है चाँद जिस सेे है ये मेरा जहाँ रौशन मैं चमक भी जाऊँ तो बन सकूँ न तारा भी

Umashankar Lekhwar

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मोहब्बत के अलावा अब न होगा रास्ता कोई नहीं महबूब तो तुझ सेे न होगा वास्ता कोई

Umashankar Lekhwar

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रहेगा अब अगर ग़म ज़िन्दगी भर तो रहेगा ये तेरा आशिक़ हुआ मैं बस तेरी आदत न हो पाया

Umashankar Lekhwar

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शामिल मेरा है नाम उन में आप को जो याद है मिलना कभी आ कर हमें फिर,आपसे फ़रियाद है बातें हज़ारों याद आती हैं हमें क्यूँ, क्या पता जो है मगर ये जान लो बस आप के वो बा'द है

Umashankar Lekhwar

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