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रहेगा अब अगर ग़म ज़िन्दगी भर तो रहेगा ये तेरा आशिक़ हुआ मैं बस तेरी आदत न हो पाया

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तू ख़याल रख अपना मैं ख़याल रख लूँगा है तुझे मोहब्बत तो मैं मिसाल रख लूँगा मैं अगर तुझे दूँगा जो जवाब भी अपने तो तेरे भी होंठों पे मैं सवाल रख लूँगा

Umashankar Lekhwar

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मोहब्बत के अलावा अब न होगा रास्ता कोई नहीं महबूब तो तुझ सेे न होगा वास्ता कोई

Umashankar Lekhwar

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रूठ सा गया है कुछ मुझ सेे ये नज़ारा भी रह गया न ख़्वाबों में अब मेरे सितारा भी वो है चाँद जिस सेे है ये मेरा जहाँ रौशन मैं चमक भी जाऊँ तो बन सकूँ न तारा भी

Umashankar Lekhwar

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नहीं ये जानता उस की मोहब्बत में अगर तू रो रहा होगा नहीं मालूम जगके रातभर तू चैन अपना खो रहा होगा तेरी आँखों में दिखते हैं मुझे भी अब किसी की याद के साए मगर वो शख़्स तुझ को भूलके आख़िर कहीं अब सो रहा होगा

Umashankar Lekhwar

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रहें अब दिए रात भर के लिए यही रह गया ख़्वाब, घर के लिए

Umashankar Lekhwar

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