दिन फिरे हैं तो मिलने आए हो ये मोहब्बत मैं सब समझता हूँ तीरगी में न साथ था कोई भीड़ क्यूँँ है ये अब समझता हूँ
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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साँस लेने के भी पैसे देने होंगे इस क़दर महँगाई बढ़ती जा रही है
Shubham Rai 'shubh'
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कहानी तुम्हारी है हीरो हो तुम कहाँ कह रहे हम कि ज़ीरो हो तुम
Shubham Rai 'shubh'
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मोहब्बत से निकलना जो कभी तो देखना तुम किताब-ए-ज़ीस्त के पन्नों में लिक्खा क्या गया था
Shubham Rai 'shubh'
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साथ क्या हम चले कुछ क़दम दोस्त लगने लगे सारे ग़म बात चलने लगी आप की हँसते हँसते लगे रोने हम
Shubham Rai 'shubh'
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मौन लोगों देख कर हैरत नहीं होती या तुम्हारी भावना आहत नहीं होती क़ुछ कड़े क़ानून जो इस देश में होते बेटियों की फिर यहाँ दुर्गत नहीं होती
Shubham Rai 'shubh'
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