मोहब्बत से निकलना जो कभी तो देखना तुम किताब-ए-ज़ीस्त के पन्नों में लिक्खा क्या गया था
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तजरबा बस तुम्हें है जीने का हम ने तो ज़िंदगी गँवाई है दस्त के आप ही मुसाफ़िर हो ख़ाक हम ने कहाँ उड़ाई है
Shubham Rai 'shubh'
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कहानी तुम्हारी है हीरो हो तुम कहाँ कह रहे हम कि ज़ीरो हो तुम
Shubham Rai 'shubh'
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अना पर बात आए लहरों को भी मोड़ दूँगा कटे गर्दन भले तेरी अकड़ मैं तोड़ दूँगा रहूँगा शान से चाहे खड़ी हो मौत सम्मुख झुकाऊँगा न सर अपना ये साँसें छोड़ दूँगा
Shubham Rai 'shubh'
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ई डी का शोर है चुप-चाप रहो सत्ता पुर-ज़ोर है चुप-चाप रहो भागकर मुझ सेे तू जाएगा कहाँ रेड हर ओर है चुप-चाप रहो
Shubham Rai 'shubh'
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दिन फिरे हैं तो मिलने आए हो ये मोहब्बत मैं सब समझता हूँ तीरगी में न साथ था कोई भीड़ क्यूँँ है ये अब समझता हूँ
Shubham Rai 'shubh'
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