ई डी का शोर है चुप-चाप रहो सत्ता पुर-ज़ोर है चुप-चाप रहो भागकर मुझ सेे तू जाएगा कहाँ रेड हर ओर है चुप-चाप रहो
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मुझे आँखें दिखा कर बोलती है चुप रहो भैया बहिन छोटी भले हो बात वो अम्मा सी करती है
Divy Kamaldhwaj
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खेल ज़िंदगी के तुम खेलते रहो यारो हार जीत कोई भी आख़िरी नहीं होती
Hastimal Hasti
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तुम सलामत रहो हज़ार बरस हर बरस के हों दिन पचास हज़ार
Mirza Ghalib
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गर्म आँसू और ठंडी आहें मन में क्या क्या मौसम हैं इस बग़िया के भेद न खोलो सैर करो ख़ामोश रहो
Ibn E Insha
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मेरी नम आँखों में सावन देखते हैं ये उम्र भर रोते रहो इनको हँसाने में
nakul kumar
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जो लगेगा मौक़ा तो पूछेंगे हम इश्क़ ये मरहम है तो किस के लिए
Shubham Rai 'shubh'
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साँस लेने के भी पैसे देने होंगे इस क़दर महँगाई बढ़ती जा रही है
Shubham Rai 'shubh'
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अना पर बात आए लहरों को भी मोड़ दूँगा कटे गर्दन भले तेरी अकड़ मैं तोड़ दूँगा रहूँगा शान से चाहे खड़ी हो मौत सम्मुख झुकाऊँगा न सर अपना ये साँसें छोड़ दूँगा
Shubham Rai 'shubh'
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दिन फिरे हैं तो मिलने आए हो ये मोहब्बत मैं सब समझता हूँ तीरगी में न साथ था कोई भीड़ क्यूँँ है ये अब समझता हूँ
Shubham Rai 'shubh'
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दिल लगाओ अबकी तुम, हिजरत करेंगे हम फिर बताना दर्द मीठा है कि कड़वा है
Shubham Rai 'shubh'
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