दो दफ़ा ग़ुस्सा हुए वो एक ग़लती पर मेरी रात की रोटी सवेरे काम में लाई गई
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
Tehzeeb Hafi
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बहुत हैरान हैं हम भी तुम्हारे बिन बना दिया किसी की मुस्कुराहट ने हमारा दिन बना दिया
Tanoj Dadhich
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जो साँसों को गिनते गिनते जीता है उस की मौत ज़रा जल्दी आ जाती है
Tanoj Dadhich
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जब राह झूठ की चुनी तो लिफ़्ट भी मिली और सच की राह में मिले पैरों के बस निशाँ
Tanoj Dadhich
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ज़िन्दगी पर लिख दिया था नाम मैं ने राम का और फिर दुख के समुंदर पार सारे हो गए
Tanoj Dadhich
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हिज्र की रातें इतनी भारी होती हैं जैसे छाती पर ऐरावत बैठा हो
Tanoj Dadhich
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