दो गज़ जमीँ, सफ़ेद कफ़न, बदहवा से लाश मौत आई और ज़िन्दगी का दाम दे गई
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मौत का भी इलाज हो शायद ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं
Firaq Gorakhpuri
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तो देख लेना हमारे बच्चों के बाल जल्दी सफ़ेद होंगे हमारी छोड़ी हुई उदासी से सात नस्लें उदास होंगी
Danish Naqvi
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मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यूँँ रात भर नहीं आती
Mirza Ghalib
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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दो गज़ सही मगर ये मेरी मिल्कियत तो है ऐ मौत तू ने मुझे ज़मींदार कर दिया
Rahat Indori
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कैसे कहें के ज़ीस्त में अव्वल है शा'इरी अब तक हमारे हाथ ही रोटी कमाते हैं
Mohammad Aquib Khan
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ये बात और है कभी मातम नहीं किया लेकिन तुम्हारे हिज्र का ग़म कम नहीं किया इक दर्द सा ही बनके मेरे साथ तू रहे कुछ इस लिए भी ज़ख़्मों पे मरहम नहीं किया
Mohammad Aquib Khan
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हार कर ख़ुद-कुशी जो करते हैं उन सेे कहना अच्छा होता नहीं माँ-बाप को बेवा करना
Mohammad Aquib Khan
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तुम ख़ुद ही जान जाओगे फिर हाल-ए-दिल मेरा मैं ने जो दी थी तुम को किताबें, पढ़ा करो
Mohammad Aquib Khan
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ज़ालिम से डरने वालों ज़रा याद तो करो थी सैंकड़ो की फ़ौज बहत्तर के सामने
Mohammad Aquib Khan
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