ये बात और है कभी मातम नहीं किया लेकिन तुम्हारे हिज्र का ग़म कम नहीं किया इक दर्द सा ही बनके मेरे साथ तू रहे कुछ इस लिए भी ज़ख़्मों पे मरहम नहीं किया
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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हार कर ख़ुद-कुशी जो करते हैं उन सेे कहना अच्छा होता नहीं माँ-बाप को बेवा करना
Mohammad Aquib Khan
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हम सेे मिलें न आप हमें कुछ गिला नहीं पर ये कभी न बोलें के अब वास्ता नहीं कुछ इस लिए भी रास्ते अपने अलग हुए वो बोला सर झुकाओ मिरा सर झुका नहीं
Mohammad Aquib Khan
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ज़ालिम से डरने वालों ज़रा याद तो करो थी सैंकड़ो की फ़ौज बहत्तर के सामने
Mohammad Aquib Khan
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तुम अपने लहजे पे थोड़ा सा इख़्तियार रखो वगरना लोग उठाएँगे परवरिश पे सवाल
Mohammad Aquib Khan
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तुम अपना दीन दिखाओ उसे, मोहब्बत भी गले लगाओ मगर पहले तुम सलाम करो
Mohammad Aquib Khan
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