तुम अपना दीन दिखाओ उसे, मोहब्बत भी गले लगाओ मगर पहले तुम सलाम करो
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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कैसे कहें के ज़ीस्त में अव्वल है शा'इरी अब तक हमारे हाथ ही रोटी कमाते हैं
Mohammad Aquib Khan
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ये बात और है कभी मातम नहीं किया लेकिन तुम्हारे हिज्र का ग़म कम नहीं किया इक दर्द सा ही बनके मेरे साथ तू रहे कुछ इस लिए भी ज़ख़्मों पे मरहम नहीं किया
Mohammad Aquib Khan
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हम सेे मिलें न आप हमें कुछ गिला नहीं पर ये कभी न बोलें के अब वास्ता नहीं कुछ इस लिए भी रास्ते अपने अलग हुए वो बोला सर झुकाओ मिरा सर झुका नहीं
Mohammad Aquib Khan
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देखे जाते नहीं जब बुझते दियों के मंज़र कैसे देखोगे तुम उन जलते घरों के मंज़र पैरवी फूलों की हम यूँँ ही नहीं करते हैं हम ने देखें हैं बहुत कटते सरों के मंज़र
Mohammad Aquib Khan
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तुम अपने लहजे पे थोड़ा सा इख़्तियार रखो वगरना लोग उठाएँगे परवरिश पे सवाल
Mohammad Aquib Khan
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