एक ग़लत-फ़हमी ने ज़िंदा रक्खा है शे'र मेरे वो चुपके चुपके पढ़ती है
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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मेरे होंटों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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आगे चल कर जिस सेे शादी करनी हो पहले दिन से झूठ नहीं कहते उस सेे
Tanoj Dadhich
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रूह मेरी अब करेगी इंतिज़ार क़ब्र में ये फ़ोन भी रख दीजिए
Tanoj Dadhich
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इक कमरे के कोने में ग़ज़लें लिखकर शाइ'र पूरी दुनिया पर छा जाता है
Tanoj Dadhich
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जो साँसों को गिनते गिनते जीता है उस की मौत ज़रा जल्दी आ जाती है
Tanoj Dadhich
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बरस रही है आँखें हैं ये इनको बादल मत कहना मौत हुई है दिल की मेरे उस को घाइल मत कहना जीवन भर वो साथ रहेगा प्यार करेगा बस तुम को मुझ को पागल कह देती थी उस को पागल मत कहना
Tanoj Dadhich
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