एक लड़की वो जो मुझ को सजा दे कर बैठी है एक लड़का मैं जो उस सेे वफ़ा कर के बैठा हूँ
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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हर धड़कन धड़क कर कह रही है बस जबरन घुटन ये सह रही है
Ankit Jha
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ज़िंदगी मेरी है तो एक ही काम की है आरज़ू तेरी है बस एक ही नाम की है।
Ankit Jha
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हमारे दोस्त हम सेे कब के दूर हो गए ज़माना झूठ कहता है के पास है सभी
Ankit Jha
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कोई तो शौक हो, जो तुम्हें अच्छा लगेगा आ कर तुम देख लो, मैं तुम्हें अच्छा लगूँगा
Ankit Jha
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आँखें हम से फिर खेल खेल रही है देखो फिर से ये पीर झेल रही है
Ankit Jha
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