इक तमन्ना अजब शहीद हुई ज़िंदगी मौत की मुरीद हुई एक दो साल तो लगेंगे उसे शा'इरी तू भी तो जदीद हुई
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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ज़िंदगी किस तरह बसर होगी दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
Jaun Elia
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ज़िंदगी भर के लिए दिल पे निशानी पड़ जाए बात ऐसी न लिखो, लिख के मिटानी पड़ जाए
Aadil Rasheed
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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
Bashir Badr
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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मिलने के बा'द हर कोई मसरूफ़ हो गया जब तक नहीं मिले थे सभी बे क़रार थे कोई सुख़नवरी थी न कोई हुनर था पास लेकिन हमारे हक़ में तमाम इश्तिहार थे
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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तू आदतन चीज़ों को रखता था जगह पर इस लिए कमरे की सब चीज़ों को मैं भी दर-ब-दर करता रहा
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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हमारा प्यार यूँँ ही पाएमाल होता रहा हर इक सवाल के बदले सवाल होता रहा जहाँँ में जो भी है उस का लिखा हुआ है अगर तो क्या हमारा फ़क़त इस्तिमाल होता रहा
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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अगर आज मैं ने नहीं रोका तुम को तो आगे से तुम और रग़बत करोगे
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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तुम्हीं तो चले थे ज़माने से हट कर यक़ीं था तुम इक दिन हुक़ूमत करोगे
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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