हमारा प्यार यूँँ ही पाएमाल होता रहा हर इक सवाल के बदले सवाल होता रहा जहाँँ में जो भी है उस का लिखा हुआ है अगर तो क्या हमारा फ़क़त इस्तिमाल होता रहा
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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यूँँ जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या
Jaun Elia
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तब मिरा प्यार उन्हें रास नहीं आया था अब झुलसते हैं मिरे यार की तस्वीरों से
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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मिलने के बा'द हर कोई मसरूफ़ हो गया जब तक नहीं मिले थे सभी बे क़रार थे कोई सुख़नवरी थी न कोई हुनर था पास लेकिन हमारे हक़ में तमाम इश्तिहार थे
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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इक तमन्ना अजब शहीद हुई ज़िंदगी मौत की मुरीद हुई एक दो साल तो लगेंगे उसे शा'इरी तू भी तो जदीद हुई
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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बाहम किए इन्हें जो यही ढाल बन गए आई समझ में टुकड़ों की क़ुव्वत शिकस्ता दिल ये और बात उस ने किया क़त्ल अहद का ये और बात ज़िंदा थी निस्बत शिकस्ता दिल
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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तुम ने मुझ को क्या समझा जो छोड़ दिया ईंट नहीं थीं तब भी घर तो बनते थे
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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