sherKuch Alfaaz

तब मिरा प्यार उन्हें रास नहीं आया था अब झुलसते हैं मिरे यार की तस्वीरों से

More from Divyansh "Dard" Akbarabadi

हमारा प्यार यूँँ ही पाएमाल होता रहा हर इक सवाल के बदले सवाल होता रहा जहाँँ में जो भी है उस का लिखा हुआ है अगर तो क्या हमारा फ़क़त इस्तिमाल होता रहा

Divyansh "Dard" Akbarabadi

0 likes

तू आदतन चीज़ों को रखता था जगह पर इस लिए कमरे की सब चीज़ों को मैं भी दर-ब-दर करता रहा

Divyansh "Dard" Akbarabadi

1 likes

बाहम किए इन्हें जो यही ढाल बन गए आई समझ में टुकड़ों की क़ुव्वत शिकस्ता दिल ये और बात उस ने किया क़त्ल अहद का ये और बात ज़िंदा थी निस्बत शिकस्ता दिल

Divyansh "Dard" Akbarabadi

1 likes

मिलने के बा'द हर कोई मसरूफ़ हो गया जब तक नहीं मिले थे सभी बे क़रार थे कोई सुख़नवरी थी न कोई हुनर था पास लेकिन हमारे हक़ में तमाम इश्तिहार थे

Divyansh "Dard" Akbarabadi

1 likes

तुम्हीं तो चले थे ज़माने से हट कर यक़ीं था तुम इक दिन हुक़ूमत करोगे

Divyansh "Dard" Akbarabadi

2 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Divyansh "Dard" Akbarabadi.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Divyansh "Dard" Akbarabadi's sher.