बाहम किए इन्हें जो यही ढाल बन गए आई समझ में टुकड़ों की क़ुव्वत शिकस्ता दिल ये और बात उस ने किया क़त्ल अहद का ये और बात ज़िंदा थी निस्बत शिकस्ता दिल
Related Sher
क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
306 likes
भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
Tehzeeb Hafi
272 likes
गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए
Tehzeeb Hafi
267 likes
क्या हुआ जो मुझे हम-उम्र मोहब्बत न मिली मेरी ख़्वाहिश भी यही थी कि बड़ी आग लगे
Muzdum Khan
62 likes
मेरा किरदार मेरी बात कहाँ सुनता है ये समझदार मेरी बात कहाँ सुनता है इश्क़ है वादा-फ़रामोश नहीं है कोई दिल तलबगार मेरी बात कहाँ सुनता है
Vishal Singh Tabish
66 likes
More from Divyansh "Dard" Akbarabadi
क्यूँ मिरे फूल से चेहरे यूँँ है मुरझाया सा तुझ सा तो बाग़-ए-जहाँ में कोई दूजा भी नहीं
Divyansh "Dard" Akbarabadi
1 likes
बेटे के हाथ में लगी तलवार देख कर माँ डर गई थी वक़्त की रफ़्तार देख कर
Divyansh "Dard" Akbarabadi
1 likes
तू आदतन चीज़ों को रखता था जगह पर इस लिए कमरे की सब चीज़ों को मैं भी दर-ब-दर करता रहा
Divyansh "Dard" Akbarabadi
1 likes
तब मिरा प्यार उन्हें रास नहीं आया था अब झुलसते हैं मिरे यार की तस्वीरों से
Divyansh "Dard" Akbarabadi
0 likes
मिलने के बा'द हर कोई मसरूफ़ हो गया जब तक नहीं मिले थे सभी बे क़रार थे कोई सुख़नवरी थी न कोई हुनर था पास लेकिन हमारे हक़ में तमाम इश्तिहार थे
Divyansh "Dard" Akbarabadi
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Divyansh "Dard" Akbarabadi.
Similar Moods
More moods that pair well with Divyansh "Dard" Akbarabadi's sher.







