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बाहम किए इन्हें जो यही ढाल बन गए आई समझ में टुकड़ों की क़ुव्वत शिकस्ता दिल ये और बात उस ने किया क़त्ल अहद का ये और बात ज़िंदा थी निस्बत शिकस्ता दिल

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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं

Tehzeeb Hafi

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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है

Tehzeeb Hafi

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गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए

Tehzeeb Hafi

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क्या हुआ जो मुझे हम-उम्र मोहब्बत न मिली मेरी ख़्वाहिश भी यही थी कि बड़ी आग लगे

Muzdum Khan

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मेरा किरदार मेरी बात कहाँ सुनता है ये समझदार मेरी बात कहाँ सुनता है इश्क़ है वादा-फ़रामोश नहीं है कोई दिल तलबगार मेरी बात कहाँ सुनता है

Vishal Singh Tabish

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