बेटे के हाथ में लगी तलवार देख कर माँ डर गई थी वक़्त की रफ़्तार देख कर
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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मिलने के बा'द हर कोई मसरूफ़ हो गया जब तक नहीं मिले थे सभी बे क़रार थे कोई सुख़नवरी थी न कोई हुनर था पास लेकिन हमारे हक़ में तमाम इश्तिहार थे
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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तब मिरा प्यार उन्हें रास नहीं आया था अब झुलसते हैं मिरे यार की तस्वीरों से
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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हमारा प्यार यूँँ ही पाएमाल होता रहा हर इक सवाल के बदले सवाल होता रहा जहाँँ में जो भी है उस का लिखा हुआ है अगर तो क्या हमारा फ़क़त इस्तिमाल होता रहा
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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क्यूँ मिरे फूल से चेहरे यूँँ है मुरझाया सा तुझ सा तो बाग़-ए-जहाँ में कोई दूजा भी नहीं
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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तू आदतन चीज़ों को रखता था जगह पर इस लिए कमरे की सब चीज़ों को मैं भी दर-ब-दर करता रहा
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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