तू आदतन चीज़ों को रखता था जगह पर इस लिए कमरे की सब चीज़ों को मैं भी दर-ब-दर करता रहा
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मैं भी मुँह में ज़बान रखता हूँ काश पूछो कि मुद्दआ' क्या है
Mirza Ghalib
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ज़िंदगी भर वो उदासी के लिए काफ़ी है एक तस्वीर जो हँसते हुए खिंचवाई थी
Yasir Khan
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काम आया तिरंगा कफ़न के लिए कोई क़ुर्बां हुआ था वतन के लिए सोचो क्या कर लिया तुम ने जी कर के दोस्त नस भी काटी तो बस इक बदन के लिए
Neeraj Neer
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कमरे में सिगरेटों का धुआँ और तेरी महक जैसे शदीद धुँध में बाग़ों की सैर हो
Umair Najmi
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इसी जगह इसी दिन तो हुआ था ये एलान अँधेरे हार गए ज़िंदाबाद हिन्दोस्तान
Javed Akhtar
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तब मिरा प्यार उन्हें रास नहीं आया था अब झुलसते हैं मिरे यार की तस्वीरों से
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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इक तमन्ना अजब शहीद हुई ज़िंदगी मौत की मुरीद हुई एक दो साल तो लगेंगे उसे शा'इरी तू भी तो जदीद हुई
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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तुम्हीं तो चले थे ज़माने से हट कर यक़ीं था तुम इक दिन हुक़ूमत करोगे
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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मिलने के बा'द हर कोई मसरूफ़ हो गया जब तक नहीं मिले थे सभी बे क़रार थे कोई सुख़नवरी थी न कोई हुनर था पास लेकिन हमारे हक़ में तमाम इश्तिहार थे
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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गम-ए-दिल सुनाया सभी को ये कह कर किसी को भी ये सब बताना नहीं है
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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