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गम-ए-दिल सुनाया सभी को ये कह कर किसी को भी ये सब बताना नहीं है

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मिलने के बा'द हर कोई मसरूफ़ हो गया जब तक नहीं मिले थे सभी बे क़रार थे कोई सुख़नवरी थी न कोई हुनर था पास लेकिन हमारे हक़ में तमाम इश्तिहार थे

Divyansh "Dard" Akbarabadi

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हमारा प्यार यूँँ ही पाएमाल होता रहा हर इक सवाल के बदले सवाल होता रहा जहाँँ में जो भी है उस का लिखा हुआ है अगर तो क्या हमारा फ़क़त इस्तिमाल होता रहा

Divyansh "Dard" Akbarabadi

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तब मिरा प्यार उन्हें रास नहीं आया था अब झुलसते हैं मिरे यार की तस्वीरों से

Divyansh "Dard" Akbarabadi

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बाहम किए इन्हें जो यही ढाल बन गए आई समझ में टुकड़ों की क़ुव्वत शिकस्ता दिल ये और बात उस ने किया क़त्ल अहद का ये और बात ज़िंदा थी निस्बत शिकस्ता दिल

Divyansh "Dard" Akbarabadi

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तुम ने मुझ को क्या समझा जो छोड़ दिया ईंट नहीं थीं तब भी घर तो बनते थे

Divyansh "Dard" Akbarabadi

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